बूढ़े मां बाप की फ़टी हथेली प्यार से जब सहलाएगा चलना सिखाया जिसने उनकी तू लाठी बन बूढ़े मां बाप की फ़टी हथेली प्यार से जब सहलाएगा चलना सिखाया जिसने उन...
उदासी भरा दिन उसमें खोज रही हूं तुम्हें, क्षितिज के इस छोर से उस छोर तक उदासी भरा दिन उसमें खोज रही हूं तुम्हें, क्षितिज के इस छोर से उस छोर तक
महसूस होता है कि तुम यहीं कहीं हो यहीं कहीं हो। महसूस होता है कि तुम यहीं कहीं हो यहीं कहीं हो।
ये कविता हर इंसान के लिए है, महज़ लड़कियों के लिए नहीं, हर उस इंसान के लिए, जो सांस ले रहा है, जी रहा ... ये कविता हर इंसान के लिए है, महज़ लड़कियों के लिए नहीं, हर उस इंसान के लिए, जो सां...
रूपांतरित कर देना का सब कुछ खुद सा सब कुछ स्वीकार करते हुये। रूपांतरित कर देना का सब कुछ खुद सा सब कुछ स्वीकार करते हुये।
कहने को दो-दो घर मेरे, फिर भी मैं पराई हूँ ! कहने को दो-दो घर मेरे, फिर भी मैं पराई हूँ !